4 नृसिंह अवतार / Narsingh Avatar
नृसिंह अवतार / Narsingh Avatar अपने प्रिय भाई हिरण्याक्ष के वध से संतप्त होकर हिरण्यकश्यप दैत्यों और दानवों को अत्याचार करने की आज्ञा देकर स्वयं महेन्द्राचल पर्वत पर चला गया। उसके ह्रदय में वैर की आग धधक रही थी अतः वह भगवान विष्णु से बदला लेने के लिए ब्रह्मा जी की घोर तपस्या करने लगा। इधर हिरण्यकश्यप को तपस्या में रत देखकर देवराज इन्द्र ने दैत्यों पर चढ़ाई कर दी। दैत्यगण राजाविहीन होने के कारण युद्ध में पराजित हुए और भाग कर पाताललोक में शरण ली। इन्द्र ने राजमहल में प्रवेश करके हिरण्यकश्यप की पत्नी कयाधू को बंदी बना लिया। उस समय वह गर्भवती थी, इसलिए इन्द्र उसे साथ लेकर अमरावती की ओर जाने लगे। रास्ते में उनकी देवर्षि नारद से भेंट हो गयी। नारद जी ने कहा – ” देवराज, इसे कहाँ ले जा रहे हो ? ” इन्द्र ने कहा – ” देवर्षे ! इसके गर्भ में हिरण्यकश्यप का अंश है, उसे मार कर इसे छोड़ दूंगा। “ यह सुनकर नारद जी ने कहा – ” देवराज ! इसके गर्भ में बहुत बड़ा भगवद्भक्त है, जिसे मारना तुम्हारी शक्ति के बाहर है, अतः इसे छोड़ दो। “ नारद जी के कथन का मान रखते हुए इन्द्र ने कयाधू को छोड़ दिया और अमरावती च...
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