दशा माता की कथा
दशा माता की कथा | Dasha Mata Vrat Katha In Hindi सालों पहले नल नामक एक राजा राज किया करते थे। उनकी पत्नी का नाम दमयंती था। दोनों अपने दो बेटों के साथ सुखी जीवन जी रहे थे। राजा के शासन में प्रजा भी काफी समृद्ध और सुखी थी। कुछ समय बाद होली दशा का त्योहार आया। दोपहर के समय जब रानी अपने कमरे में आराम कर रही थी, तो एक ब्राह्मण महिला राजमहल आईं और रानी से मुलाकात करने की इच्छा जताई। आज्ञा मिलने पर उस ब्राह्मणी को रानी के पास ले जाया गया। रानी के पास पहुंचकर उस महिला ने कहा, “हे महारानी! ये दशा डोरी तुम ले लो।” इस पर वहां खड़ी दासी भी बोली, “हां महारानी, आज होली दशा है और आज के दिन विवाहित महिलाएं दशा माता का व्रत करती हैं। इस व्रत में महिलाएं इसी डोरी की आराधना कर उसे अपने गले में बांधती हैं। इसे बांधने से घर की सुख-शांति बनी रहती है।” दासी की इस बात को सुनने के बाद रानी दमयंती ने उस डोरी की पूजा कर उसे अपने गले में बांध लिया। कुछ दिन बीतने के बाद राजा नल ने अपनी पत्नी के गले में उस डोरी को बंधा देखा। उसे देखते ही राजा ने अपनी पत्नी से पूछा, “हे प्रिय! आपके पास इतने सोने के हार होने के बावजू...