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समुद्र मंथन की कथा

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समुद्र मंथन की कथा   समुद्र मंथन एक अत्यंत महत्वपूर्ण पौराणिक घटना है जिसमें अमृत की प्राप्ति के लिए देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। आइये विस्तार से जानते हैं समुद्र मंथन की कथा , उसका कारण और परिणाम। ये कहानी शुरू होती है महर्षि दुर्वासा के शाप से जो उन्होंने देवराज इन्द्र को दिया था। महर्षि दुर्वासा भगवान शिव के ही अंशावतार थे और अपने क्रोध के लिए प्रसिद्ध थे पर ये बात और थी कि उनके क्रोध में भी कल्याण छिपा रहता था। समुद्र मंथन का कारण एक बार दुर्वासा मुनि पृथ्वी पर विचरण कर रहे थे। घूमते घूमते उन्होंने एक विद्याधरी के हाथों में सन्तानक पुष्पों की एक दिव्य माला देखी। उस दिव्य माला की सुगंध से वह वन सुवासित हो रहा था। तब उन्मत्त वृत्ति वाले दुर्वासा जी ने वह सुन्दर माला देखकर उसे उस विद्याधर सुंदरी से माँगा। उनके माँगने पर उस विद्याधरी ने उन्हें आदरपूर्वक प्रणाम करके वह माला दे दी। दुर्वासा मुनि ने उस माला को अपने मस्तक पर डाल लिया और पृथ्वी पर विचरने लगे। इसी समय उन्होंने ऐरावत पर विराजमान देवराज इन्द्र को देवताओं के साथ आते देखा। उन्हें देखकर दुर्वासा मु...