5 वामन अवतार / Vamana Avatar

 वामन अवतार / Vamana Avatar

एक समय देवताओं और दैत्यों में युद्ध हुआ। देवता पराजित हुए और दैत्यों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।

तब देवताओं की रक्षा और दैत्यों के विनाश के लिए महर्षि कश्यप और देवमाता अदिति ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की।


उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने कश्यप और अदिति के पुत्र रूप में जन्म लेने का वचन दिया। साथ ही देवताओं पर आयी हुई विपत्ति का नाश करने का भी वरदान दिया।

समय आने पर अदिति के गर्भ से भगवान विष्णु ने वामन अवतार ग्रहण किया। भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करके माता अदिति को अपार हर्ष हुआ तब कश्यप जी ने उनका जातकर्म संस्कार किया।

इसके बाद ब्रह्मर्षियों ने भगवान वामन का उपनयन संस्कार किया। उस समय वामन बटुक को महर्षि पुलह ने यज्ञोपवीत, पुलस्त्य ने दो श्वेत वस्त्र, अगस्त्य ने मृगचर्म, भरद्वाज ने मेखला,

मरीचि ने पलाशदंड, वशिष्ठ ने अक्षसूत्र, अंगिरा ने कुश का बना हुआ वस्त्र, सूर्य ने क्षत्र, भृगु ने खड़ाऊं और देवगुरु बृहस्पति ने कमण्डलु प्रदान किया।

उपनयन के बाद भगवान वामन ने अङ्गोंसहित वेदों और शास्त्रों का अध्ययन करके एक ही मास में उनमें निपुणता प्राप्त कर ली।

प्रह्लाद का प्रपौत्र दैत्यराज बलि प्रजापालक, न्यायप्रिय और दानवीर था। वो भगवत्भक्त भी था पर उसे अपने दानवीर होने का घमंड हो गया था।

एक बार बलि ने तीनों लोकों का राज्य पाने के लिए अश्वमेध यज्ञ किया। वामन भगवान छोटे बटुक ब्राह्मण के रूप में राजा बलि के यज्ञ में पहुँचे।

भगवान वामन बलि के यज्ञ में पहुँच कर दान में तीन पग भूमि मांगी और दो पगों में ही बलि का सारा राज्य ले लिया।

जब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा तब बलि ने हार मान ली और भगवान ने उसे उत्तम गति प्रदान की और भाई बंधुओं के साथ सुतल लोक में भेज दिया।

इसके बाद इन्द्र को स्वर्ग का अधिपति और देवताओं को यज्ञ याग भोजी बनाकर सबके देखते हुए अंतर्ध्यान हो गए।

{Ram Yug Darshan}

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