विराध और राम की कहानी
विराध और राम की कहानी
राम जब सीता और लक्ष्मण के साथ दंडकारण्य में थे तभी उनका सामना मनुष्य भक्षि देत्ये विराध से हुआ। दैत्य ने सीता को उठा लिया और उन्हें ले जाने लगा राम ने अपना धनुष निकाल लिया। विराध उनके छोटे से धनुष को देखकर हंसने लगा
और उसने पल भर में उनके धनुष को अपनी उंगली से तोड़ डाला।
राम समझ गए कि विराट के सामने धनुष का इस्तेमाल करना बेकार है। राम और लक्ष्मण ने उसके हाथ अलग कर देने का निश्चय किया। दोनों ने पूरी शक्ति से उसके हाथ खींच दिए, और उसे नीचे पटक दिया।
राम ने फुर्ती से विराध के ऊपर अपना पैर रख दिया उनके ऐसा करते ही चमत्कार हो गया। विराट की आंखों से विनम्रता झलकने लगी।
अपने हाथ जोड़कर वह कहने लगा, “आपके चरणों ने मेरे मन को शुद्ध कर दिया है। मैं देत्ये नहीं गंधर्व हुँ,कृपया मुझे मार डालिए और मुझे श्राप मुक्त कर दीजिए।”
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