7कालरात्रि माता की कथा (Kalratri mata story)

 कालरात्रि माता की कथा (Kalratri mata story)

पौराणिक कथाओं के अनुसार शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नामक तीन दुष्ट दैत्य थे। इन तीनों ने मिलकर तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था। समस्त प्राणियों और देवताओं के सामने जीवन संकट उत्पन्न हो गया था। इन दुष्ट दैत्यों के बल के आगे कोई भी अस्त्र-शस्त्र टिक नहीं पा रहा था। परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसे समस्त प्राणियों और अपने प्राणों की रक्षा की गुहार लगाई। शिवजी ने देवताओं की व्यथा को समझते हुए उन्हे शीघ्र हीं इस संकट से छुटकारा दिलाने एवं समस्त प्राणियों की सुरक्षा का वचन दिया।


 

शंकर जी को पता था की इस दैत्य का संहार माता पार्वती हीं कर सकती हैं। तत्पश्चात भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा की ‘आप आदिशक्ति जगतजननी हैं, आपके तेज का सामना तीनों लोकों मे कोई नहीं कर सकता है ,  आप इन दुष्ट राक्षसों का वध करके इस सृष्टि की रक्षा करें।’ शिवजी की आज्ञा पाकर माता पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ एवं रक्तबीज का वध करने निकल पड़ीं।

मगर उन दानवों को समाप्त करने मे एक विकराल समस्या थी। रक्तबीज को यह वरदान मिला हुआ था की, जहां भी उसके रक्त की एक भी बूंद गिरेगी वहाँ रक्तबीज जैसा दूसरा दानव उत्पन्न हो जाएगा।  जिसके कारण उसका वध करना अत्यधिक कठिन था।

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